खुदा की है दर्द नेमत
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दर्द से ही तो सजी है ,
आज सबकी जिन्दगी ।
दर्द जिसमें ना छुपा हो ,
रंगहीन वो जिन्दगी ।
दर्द जिसमें एकदम ना ,
क्रूर है वह जिन्दगी ।
आज मिलकर सब करें ,
इस दर्द की हम वन्दगी ।
दर्द के अहसास से ही ,
हम बचाते जिन्दगी ।
दर्द के ही सर्द में ,
महफूज है यह जिन्दगी ।
दर्द जिनका खत्म है ,
वो खत्म करते जिन्दगी ।
खुदा की है दर्द नेमत ,
चूम इसको जिन्दगी ।।
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दर्द से ही तो सजी है ,
आज सबकी जिन्दगी ।
दर्द जिसमें ना छुपा हो ,
रंगहीन वो जिन्दगी ।
दर्द जिसमें एकदम ना ,
क्रूर है वह जिन्दगी ।
आज मिलकर सब करें ,
इस दर्द की हम वन्दगी ।
दर्द के अहसास से ही ,
हम बचाते जिन्दगी ।
दर्द के ही सर्द में ,
महफूज है यह जिन्दगी ।
दर्द जिनका खत्म है ,
वो खत्म करते जिन्दगी ।
खुदा की है दर्द नेमत ,
चूम इसको जिन्दगी ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
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