,प्रेशर से मरेगा
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सब चुप रहेंगे ,सिर्फ तेरा , जुर्म बोलेगा ।
हर जख्म तेेरी ज्यादती , का राज खोलेगा ।
तेरे ही तिकड़मों से वह , बज्र बनेगा ,
जो गलतियों की शै में ,तुझे हज्म करेगा ।।
अपराध से तुल्य तेरे , कृत्य जो होंगे ,
तिहाड़ ही मुकाम , तेरा हस्र बनेगा ।
बक गालियाॅं न चैन की ,तूू नीद सोएगा ,
सच मान कि तू जल्द ही ,प्रेशर से मरेगा ।।
रचयिता --- कवि सर्वाननन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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सब चुप रहेंगे ,सिर्फ तेरा , जुर्म बोलेगा ।
हर जख्म तेेरी ज्यादती , का राज खोलेगा ।
तेरे ही तिकड़मों से वह , बज्र बनेगा ,
जो गलतियों की शै में ,तुझे हज्म करेगा ।।
अपराध से तुल्य तेरे , कृत्य जो होंगे ,
तिहाड़ ही मुकाम , तेरा हस्र बनेगा ।
बक गालियाॅं न चैन की ,तूू नीद सोएगा ,
सच मान कि तू जल्द ही ,प्रेशर से मरेगा ।।
रचयिता --- कवि सर्वाननन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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