पन्द्रह अगस्त
पन्द्रह अगस्त पन्द्रह अगस्त हरभारतीय को कण्ठस्थ ।
अंग्रेज हुकूमत अपदस्थ सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
अंग्रेज हुकूमत अपदस्थ सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
हर गाँव नगर से चली टोली जब मची खून की वह होली ।
तोपें बन्दूकें हुईं न्यस्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
तोपें बन्दूकें हुईं न्यस्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
जब जान पे खेले सेनानी तब ब्रिटिश फौज भी हुई त्रस्त ।
यूं हिम्मत उनकी हुई पस्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
यूं हिम्मत उनकी हुई पस्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
उत्सर्ग प्राण कर गए लाल भारत का ऊँचा किए भाल ।
भय फॉंसी का भी नहीं व्यक्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
भय फॉंसी का भी नहीं व्यक्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
ललनाओं ने भी दिए प्राण तब ही दासता से मिली त्राण ।
स्वराज दिलाए देशभक्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
स्वराज दिलाए देशभक्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त।।
दिवंगतों की ज्योति अमर बलिदान की उनसे मिली डगर ।
शासन परदेशी हुआ ध्वस्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त ।।
शासन परदेशी हुआ ध्वस्त सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त ।।
श्रद्धाञ्जलि होकर संगठित करके उनको महिमामण्डित ।
उनके चरणों में विनत-प्रणत सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त
उनके चरणों में विनत-प्रणत सन् सैंतालिस पन्द्रह अगस्त
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें