मादकता न बढ़ाइए
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मादकता न बढ़ाइए , खोज प्रसाधन तंत्र ।
सेक्सी , वेरीहाट बनि ,त्राहि - त्राहि का मंत्र।।
मादा पशु हो हाट जब , व्यग्र समागम काल ।
पागल , नर की खोज में , तोड़ें वन्धन जाल ।।
प्रमुख आय का स्रोत है ,बढ़े नसा व्यापार ।
ऊपर से कैप्सुल बिके , नारी संग प्रचार ।।
वीतराग योगी नहीं , हैं साधारण लोग ।
मादकता,श्रृंगार अति , प्रेरित करता भोग ।।
अति उच्छृंखल भोग ही , अनाचार का मूल ।
चोरी ,हिंसा,झूठ,छल , इसी के उपजे शूल ।।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
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मादकता न बढ़ाइए , खोज प्रसाधन तंत्र ।
सेक्सी , वेरीहाट बनि ,त्राहि - त्राहि का मंत्र।।
मादा पशु हो हाट जब , व्यग्र समागम काल ।
पागल , नर की खोज में , तोड़ें वन्धन जाल ।।
प्रमुख आय का स्रोत है ,बढ़े नसा व्यापार ।
ऊपर से कैप्सुल बिके , नारी संग प्रचार ।।
वीतराग योगी नहीं , हैं साधारण लोग ।
मादकता,श्रृंगार अति , प्रेरित करता भोग ।।
अति उच्छृंखल भोग ही , अनाचार का मूल ।
चोरी ,हिंसा,झूठ,छल , इसी के उपजे शूल ।।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
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