अग्निपुत्री : टेसी थामस
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प्यारों में पली , नाजों में ढली ,
भारत की बेटी बढ़ी चली ।
फिर फूल बनी नन्हीं - सी कली ,
पूरे जग में अब महक चली ।।
श्री विजय ध्वजा फहराने को ,
बन शान्ति पुजारिन वह मचली ।
दुुश्मन का दिल दहलाने को ,
अब अग्नि मिशाइल में बदली ।।
वीणा पाणिनि की कृपा मिली ,
अब्दुल कलाम की स्वप्न बनी ।
मिशाइल मैन की राह चुनी ,
मिशाइल वूमन स्वयं बनी ।।
भारत का अनुसन्धान देख ,
आश्चर्य - चकित हैं छली - बली ।
दुश्मन की आॅंखें सहम गईं ,
आलोचक बन गए देश खली ।।
बढ़ - चढ़कर धमकी देते जो ,
उन माननीयों की शान घटी ।
तब शान्तिविरोधी कदम बता ,
कर रहे बात वे जली - कटी ।।
परमाणु शक्ति या कम्प्यूटर ,
याकि अन्तरिक्ष अनुसन्धान ।
निर्माण मिशाइल आयुध का ,
या सामाजिक आर्थिक उत्थान ।।
शिक्षा संस्कृति सभ्यता में भी ,
सहिष्णुता धार्मिक आधान ।
अध्यात्म में अग्र गण्य ,
ब्यापार वाणिज्यिक उपादान ।।
हरित क्रान्ति या श्वेत क्रान्ति ,
औद्योगिक संचार क्रान्ति ।
हर क्षेत्र में भारत है आगे ,
अब रहे न इसमें तनिक भ्रान्ति ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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प्यारों में पली , नाजों में ढली ,
भारत की बेटी बढ़ी चली ।
फिर फूल बनी नन्हीं - सी कली ,
पूरे जग में अब महक चली ।।
श्री विजय ध्वजा फहराने को ,
बन शान्ति पुजारिन वह मचली ।
दुुश्मन का दिल दहलाने को ,
अब अग्नि मिशाइल में बदली ।।
वीणा पाणिनि की कृपा मिली ,
अब्दुल कलाम की स्वप्न बनी ।
मिशाइल मैन की राह चुनी ,
मिशाइल वूमन स्वयं बनी ।।
भारत का अनुसन्धान देख ,
आश्चर्य - चकित हैं छली - बली ।
दुश्मन की आॅंखें सहम गईं ,
आलोचक बन गए देश खली ।।
बढ़ - चढ़कर धमकी देते जो ,
उन माननीयों की शान घटी ।
तब शान्तिविरोधी कदम बता ,
कर रहे बात वे जली - कटी ।।
परमाणु शक्ति या कम्प्यूटर ,
याकि अन्तरिक्ष अनुसन्धान ।
निर्माण मिशाइल आयुध का ,
या सामाजिक आर्थिक उत्थान ।।
शिक्षा संस्कृति सभ्यता में भी ,
सहिष्णुता धार्मिक आधान ।
अध्यात्म में अग्र गण्य ,
ब्यापार वाणिज्यिक उपादान ।।
हरित क्रान्ति या श्वेत क्रान्ति ,
औद्योगिक संचार क्रान्ति ।
हर क्षेत्र में भारत है आगे ,
अब रहे न इसमें तनिक भ्रान्ति ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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