खुद को ही बदल लो
----------------------
हालात जो न बदले , तो खुद को ही बदल लो ।
बस भावना है सुख - दु:ख , निज सोच में दखल दो ।
मन से बीमार जबतक , सुख भी नहीं सुहाए ।
मन ठीक जो रहे तो , गम भी नहीं रुलाए ।
धन की तू भूख छोड़ो , वह शान्त ना कभी हो ।
करुणा दया रहे तो , सुख की नहीं कमी हो ।
कठिनाइयों से खेलो , पुरुषार्थ को जगाए ।
कुछ भी तो ऐसा कर लो , जीवन सफल बनाए ।।
रचयिता ------ सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
उप मुख्य प्रशासक / अटल कवि परिवार
----------------------
हालात जो न बदले , तो खुद को ही बदल लो ।
बस भावना है सुख - दु:ख , निज सोच में दखल दो ।
मन से बीमार जबतक , सुख भी नहीं सुहाए ।
मन ठीक जो रहे तो , गम भी नहीं रुलाए ।
धन की तू भूख छोड़ो , वह शान्त ना कभी हो ।
करुणा दया रहे तो , सुख की नहीं कमी हो ।
कठिनाइयों से खेलो , पुरुषार्थ को जगाए ।
कुछ भी तो ऐसा कर लो , जीवन सफल बनाए ।।
रचयिता ------ सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
उप मुख्य प्रशासक / अटल कवि परिवार
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें