गुरुवार, 18 जून 2015

शब्द ही विषदन्त होगा
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जब हमारी सभ्यता को ,
कुटिलता का दंश होगा ।
जब कभी भी समाज में ,
रावण या कोई कंस होगा ।
कलम तब तलवार होगी ,
शब्द ही विषदन्त होगा ।
पाप का तब ही सुनिश्चित ,
मूलत: ही अन्त होगा ।
लोकोपयोगी दृष्टि का तो ,
जब कभी अपकर्ष होगा ।
शक्ति के आराधकों में ,
नाशमय संघर्ष होगा।
मानवीय विचार का तब ,
धर्ममय उत्कर्ष होगा ।
तब अनैतिक आचरण पर ,
काल का दुर्घर्ष होगा ।।
रचयिता --------
सर्वानन्द पाण्डेय ' अविज्ञात '

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