दाता
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जो बदले में कुछ ना चाहे , विरले मिलते ऐसे दाता ।
जो कृपा अकारण बरसावे , हर गीत भलाई के गाता ।।
अधिकाधिक स्वारथ अवगाहे , कल्याण कृपा जो दिखलाता ।
अति अतिशय प्रेम जो दिखलावे , ठहरो ,परखो उसको भ्राता ।।
अधिकांश भ्रमित कर बहकावें , कौशल ठगने का उन्हें आता ।
उपकार त्याग वे दिखलावें , अवसर का परख भी उन्हें आता ।।
वे प्रेम का दल - दल दिखलावें , पग रखता जो वह फॅंस जाता ।
गिर जाने पर जो समझ आवे , हर कोशिस में धॅंसता जाता ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ।
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जो बदले में कुछ ना चाहे , विरले मिलते ऐसे दाता ।
जो कृपा अकारण बरसावे , हर गीत भलाई के गाता ।।
अधिकाधिक स्वारथ अवगाहे , कल्याण कृपा जो दिखलाता ।
अति अतिशय प्रेम जो दिखलावे , ठहरो ,परखो उसको भ्राता ।।
अधिकांश भ्रमित कर बहकावें , कौशल ठगने का उन्हें आता ।
उपकार त्याग वे दिखलावें , अवसर का परख भी उन्हें आता ।।
वे प्रेम का दल - दल दिखलावें , पग रखता जो वह फॅंस जाता ।
गिर जाने पर जो समझ आवे , हर कोशिस में धॅंसता जाता ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ।