लौह डगर पर
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लेकर डिब्बे लौह डगर पर ,चलता इंजन छक -छक करके ।
ढेेरों यात्री सामानो को , माल जानवर भर - भर करके ।।
लम्बी गाड़ी बड़ा है इंजन ,बत्ती पानी डीजल भरके ।
आगे चालक गार्ड है पीछे , संचालन बातें कर - करके ।।
यात्रा करते बैठो सोओ , खाओ पीओ जी भर - भरके ।
शौचालय की भी सुविधा है ,साफ -सफाई घर -घर जैसे ।।
गाॅंव नगर की सैर कराती , नदियाॅं पर्वत बैठेे - बैैठेे ।
मेेल - जोल मैत्री करवाती , सहयात्री बन भेद भुलाके ।।
यह दूरस्थ शहरों को जोड़े , गाॅंवों शहरों को चल - चलके ।
संरक्षित सस्ती सेवा देे , और प्रदूषण को कम करके ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
मुख्य नियंंत्रक , पूर्वोत्तर रेेलवे , वाराणसी ।
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लेकर डिब्बे लौह डगर पर ,चलता इंजन छक -छक करके ।
ढेेरों यात्री सामानो को , माल जानवर भर - भर करके ।।
लम्बी गाड़ी बड़ा है इंजन ,बत्ती पानी डीजल भरके ।
आगे चालक गार्ड है पीछे , संचालन बातें कर - करके ।।
यात्रा करते बैठो सोओ , खाओ पीओ जी भर - भरके ।
शौचालय की भी सुविधा है ,साफ -सफाई घर -घर जैसे ।।
गाॅंव नगर की सैर कराती , नदियाॅं पर्वत बैठेे - बैैठेे ।
मेेल - जोल मैत्री करवाती , सहयात्री बन भेद भुलाके ।।
यह दूरस्थ शहरों को जोड़े , गाॅंवों शहरों को चल - चलके ।
संरक्षित सस्ती सेवा देे , और प्रदूषण को कम करके ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '
मुख्य नियंंत्रक , पूर्वोत्तर रेेलवे , वाराणसी ।
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