बुधवार, 17 जून 2015

चमत्कार
-----------
दो शिला खण्डों में
सजातीय बन्दों में
अनमनी वार्ताहो रहीअविराम ।
क्योंकर है एक पद दलित
तो दूसरा नयनाभिराम ?
हैं दोनों पाहन
पर एक बना आसन
तो दूसरे के लिए
सजा सिंहासन ।
पूछने पर पहले के
दूसरा बतलाता है
दर्शनीय होने का
कारण समझाता है ।
काटकर कठोरता से
मातृ शिलाखण्ड से
दिए गए चोट अनगिनत उसे
छेनी और हथौड़े से ।
सुना देखा था
सजीव को काट - पीटकर
मृत बना देना
पर आश्चर्य सुखद
करके यही एक पाषाण को
युगों - युगों के लिए
अमर्त्य बना देना ।
देकर शिल्पी ने चोट चतुर्दिक
छेनी और हथौड़ी से
किया अतिशय रूपायित उसे
काट - छाॅंटकर बेरहमी से ।
पूर्ण समर्पण से खाते हुए
चुपचाप चोट
मिट गए उसके
सारे वाह्यान्तर खोट ।
अपने कलात्मक करों से
मूर्तिकार ने
बनाया उसे कमनीय ,
और रचनात्मक मेधा से
सर्वप्रिय तथा दर्शनीय ।
इसप्रकार जो
बचा रहा चोट से
वह बना रहा
दयनीय ।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें