तुम भी नेता बन जाओ
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तुम भी लूटो मैं भी लूटूॅं ,
छूट पूरी , आजादी है ।
इश्क अजीजी धन मन लूटो
शस्त्र एक ही खादी है ।।
शर्त एक है रहो जहाॅं भी
सोचो करो भी मनचाहे ।
परचम गाड़ी पर लहराओ
सत्ता पार्टी अवगाहे ।।
थाना आफिस क्षेत्र कचहरी
में नेता संग दिख जाओ ।
बिना काम भी बेमतलब भी
पीछे उनके लग जाओ ।।
आन्दोलन गोष्ठी सम्मेलन
में फोटू संग खिंचवाओ ।
कर्फू बन्द में पुलिस की लाठी
बढ़ - चढ़ कर दो - एक खाओ ।।
धरना अंशनरत नेता का
साथ कभी ना विसराओ ।
टाॅंग अड़ाओ काम फंसाओ
पैसे ले -द करवाओ ।।
नेताओं की पौ बारह है
छोड़ पढ़ाई लग जाओ ।
जैसे भी हो युक्ति लगाकर
तुम भी नेता बन जाओ ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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तुम भी लूटो मैं भी लूटूॅं ,
छूट पूरी , आजादी है ।
इश्क अजीजी धन मन लूटो
शस्त्र एक ही खादी है ।।
शर्त एक है रहो जहाॅं भी
सोचो करो भी मनचाहे ।
परचम गाड़ी पर लहराओ
सत्ता पार्टी अवगाहे ।।
थाना आफिस क्षेत्र कचहरी
में नेता संग दिख जाओ ।
बिना काम भी बेमतलब भी
पीछे उनके लग जाओ ।।
आन्दोलन गोष्ठी सम्मेलन
में फोटू संग खिंचवाओ ।
कर्फू बन्द में पुलिस की लाठी
बढ़ - चढ़ कर दो - एक खाओ ।।
धरना अंशनरत नेता का
साथ कभी ना विसराओ ।
टाॅंग अड़ाओ काम फंसाओ
पैसे ले -द करवाओ ।।
नेताओं की पौ बारह है
छोड़ पढ़ाई लग जाओ ।
जैसे भी हो युक्ति लगाकर
तुम भी नेता बन जाओ ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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