सोमवार, 15 जून 2015

कलुषित कुत्सित आयासों को
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आधुनिक योग की परिभाषा ,
आए दिन होता बलात्कार ।
अब पुलिस का जीना भी दूभर ,
शिक्षित समाज का चमत्कार ।।
क्या बचा न कोई अब नेता ,
सच्ची अभिनेत्री अभिनेता ?
सामाजिक चिन्तक अध्येता ,
जो निर्वस्त्रों को ढॅंक देता ??
जो धन वैभव से ऊपर उठ ,
एक स्वस्थ आचरण बना सके ।
तन के सौन्दर्य सफाई - सा ,
मन को भी निर्मल बना सके ।।
उसका ही होगा श्रेष्ठ योग ,
उत्तम आचरण बनाने में ।
कलुषित कुत्सित आयासों को ,
संस्कार से त्वरित हटाने में ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '

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