आप नियंत्रण क्यो नहीं ?
छत्तिस को तिरसठ बना , करें छतीसा लोग ।
वय किशोर पर थोपते , सम्भोग का रोग ॥
दुष्प्रेरण अभिप्राय में , यौन प्रेरणा लाय ।
कारण को परिणाम के , संगत माना जाए ।।
सामाजिक स्थल बना , चुम-चाट के केन्द्र ।
दुष्प्रेरक य़ह कार्य है , साम्राज्य कामेन्द्र ।।
मुट्ठीभर ही लोग है , हाट-चाट शौकीन ।
भारतीय अन्दाज को , ये माने त तैहीन ॥
आप नियंत्रण क्यो नहीं , कामेक्षा पर मित्र ।
चाहे जो निर्वस्त्र या, सराबोर हो ईत्र ॥
------ कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
छत्तिस को तिरसठ बना , करें छतीसा लोग ।
वय किशोर पर थोपते , सम्भोग का रोग ॥
दुष्प्रेरण अभिप्राय में , यौन प्रेरणा लाय ।
कारण को परिणाम के , संगत माना जाए ।।
सामाजिक स्थल बना , चुम-चाट के केन्द्र ।
दुष्प्रेरक य़ह कार्य है , साम्राज्य कामेन्द्र ।।
मुट्ठीभर ही लोग है , हाट-चाट शौकीन ।
भारतीय अन्दाज को , ये माने त तैहीन ॥
आप नियंत्रण क्यो नहीं , कामेक्षा पर मित्र ।
चाहे जो निर्वस्त्र या, सराबोर हो ईत्र ॥
------ कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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