रविवार, 14 जून 2015

कामी मदन कमान
---------------------
नारी नंगी सामने , टी वी सड़क समान ।
प्रसाधन माडर्न हैं , कामी मदन कमान ।।
अपने कुत्ते को कभी , आवारों के साथ ।
उत्साहित हो मत खिला , प्यार से रोटी -भात ।।
ठंडे बादल रगड़ते , होता विद्युत कौंध ।
युवकयुवतियाॅं लपटते ,अकथ यौन का सौंध ।।
भाव रसों का त्वरित ही , मन पर पड़े प्रभाव ।
सदृश हर्ष विषाद के , प्रकट रसात्मक चाव ।।
उन्मादी लालची अगर , कारागार में बन्द ।
न्यून बचेंगे साधु जो , लखैं न सेक्सी कन्द ।।
तब कह किस उपयोग का , होगा सेक्सी रूप ।
प्यासे ही यदि ना रहें ,तब तो व्यर्थ नलकूप ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें