सज्जन से इच्छित मित्रता ,जो प्रेम सद्गुण से करे ।
श्रेष्ठ जन से विनम्रता , अनुराग विद्या से करे ।
जो प्रीति स्त्री से करे , इन्द्रिय दमन की शक्ति हो ।
जो लोक निन्दा से डरे , ईश्वर में जिसकी भक्ति हो ।
जो त्याग दुर्जन का करे ,वह ही तो सज्जन व्यक्ति है ।
प्रणम्य वह जिसकी गुणों में ,वास्तविक अनुरक्ति है ।
श्रेष्ठ जन से विनम्रता , अनुराग विद्या से करे ।
जो प्रीति स्त्री से करे , इन्द्रिय दमन की शक्ति हो ।
जो लोक निन्दा से डरे , ईश्वर में जिसकी भक्ति हो ।
जो त्याग दुर्जन का करे ,वह ही तो सज्जन व्यक्ति है ।
प्रणम्य वह जिसकी गुणों में ,वास्तविक अनुरक्ति है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें