रविवार, 14 जून 2015

सांसारिक प्रपंच 
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बुद्धिबल से मनुष्य को ,
सज्जित किया है ईश ने ।
फिर मोक्षदायी कार्य भी ,
सौंपा है देवाधीश ने ।।
किन्तु सांसारिक प्रपंचों ,
में उलझकर रह गए ।
मनुजता के गुण सभी ,
सुख खोज में ही बह गए ।।
ध्यान ईश्वर का नहीं ,
सत्कार्य में न समर्थ है ।
अप्राप्य भोगानन्द भी ,
तब जन्मना ही ब्यर्थ है ।।
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '

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