सादर अनुरोध
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बस एक कृपा अब मुझ पर कर दे ,
उर विश्वास अगाध तू भर दे ।
विनत स्वभाव सुमंगल कर दे
सद्विचार जन - जन में भर दे ,
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बस एक कृपा अब मुझ पर कर दे ,
उर विश्वास अगाध तू भर दे ।
विनत स्वभाव सुमंगल कर दे
सद्विचार जन - जन में भर दे ,
साथ बेढंगों मूर्खों के लग ,
अति बेढब मैं महा मूर्ख हूॅं ।
सिक्ख इसाई जैन पारसी ,
हिन्दू मुस्लिम बना तुर्क हूॅं ।।
अति बेढब मैं महा मूर्ख हूॅं ।
सिक्ख इसाई जैन पारसी ,
हिन्दू मुस्लिम बना तुर्क हूॅं ।।
हमसब मानव बन संग चल लें ,
प्रेम सुधारस से मन भर लें ।
ऐसी कृपा नियन्ता कर दें ,
बैर भाव सब त्वरित ही हर लें ।
प्रेम सुधारस से मन भर लें ।
ऐसी कृपा नियन्ता कर दें ,
बैर भाव सब त्वरित ही हर लें ।
यही कामना मिल सब कर लें ,
कटुता मन का हम सब झर दें ।
सुख दुख में हम साथ निभाएॅं ,
इक दूजे के गुण हम गाएॅं ।।
आपका अपना -- कवि सर्वानन्द पाण्डेय, ' अविज्ञात '
कटुता मन का हम सब झर दें ।
सुख दुख में हम साथ निभाएॅं ,
इक दूजे के गुण हम गाएॅं ।।
आपका अपना -- कवि सर्वानन्द पाण्डेय, ' अविज्ञात '
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