रच यश तन - मन रग - रग
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सब जग रस छक कर चख ,
नभ थल जल पर घर कर ,
पल - पल सत पथ पर चल ,
लड़ कट कर अब मत मर ।
भल मन बन कर अब रह ,
घन जस गल कर जल भर ,
बड़ मन बन कर जग तर ,
जड़ मन पर छल मत कर ।
बच कर मग पर पग रख ,
श्रम कर - कर नभ पर चढ़,
मन पर कस कर वश कर ,
हर दम सत पथ पर बढ़ ।
गम तम जर डर पद तल ,
रह बर बन कर मत ठग ,
सत तप नय जप कर तल ,
रच यश तन - मन रग -रग ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात
मुख्य नियंत्रक ।
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सब जग रस छक कर चख ,
नभ थल जल पर घर कर ,
पल - पल सत पथ पर चल ,
लड़ कट कर अब मत मर ।
भल मन बन कर अब रह ,
घन जस गल कर जल भर ,
बड़ मन बन कर जग तर ,
जड़ मन पर छल मत कर ।
बच कर मग पर पग रख ,
श्रम कर - कर नभ पर चढ़,
मन पर कस कर वश कर ,
हर दम सत पथ पर बढ़ ।
गम तम जर डर पद तल ,
रह बर बन कर मत ठग ,
सत तप नय जप कर तल ,
रच यश तन - मन रग -रग ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात
मुख्य नियंत्रक ।
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