आदमी सर्वजेता
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जंगल के राजा ने
जंजीर में जकडे बलशाली हाथी से
गर्मशलाका से दागे गए प्रचण्ड साॅड से,
और कान कटे बलिष्ठ भैंसे से,
पूछ कर जाना कि
उनकी वैसी दुर्दशा आदमी ने किया।
तब चल पड़ा वह आदमी की तलाश में।
फिर जड़ से कटे भू लेटे
एक विशालकाय वृक्ष को देखा।
उसके मोटे तने को
आरा से टुकड़े करते हुए
लोगों के पास पहुँचा।।
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जंगल के राजा ने
जंजीर में जकडे बलशाली हाथी से
गर्मशलाका से दागे गए प्रचण्ड साॅड से,
और कान कटे बलिष्ठ भैंसे से,
पूछ कर जाना कि
उनकी वैसी दुर्दशा आदमी ने किया।
तब चल पड़ा वह आदमी की तलाश में।
फिर जड़ से कटे भू लेटे
एक विशालकाय वृक्ष को देखा।
उसके मोटे तने को
आरा से टुकड़े करते हुए
लोगों के पास पहुँचा।।
शेर को देख वे दहल गए।
क्षतिकारित न करने का
उन्हें आश्वासन देकर
शेर ने पूछा-
पेड़ की वैसी हालत किसने की?
उत्तर मिला-
आदमी ने।
शेर ने आदमी दिखाने का
उनसे आग्रह किया।
भयभीत आरा वालों ने शेर से कहा-
पहे अपना पंजा वह
लकड़ी की फाँक में लगावे।
ताकि आरा निकालकर आराम से
उसे आदमी दिखाया जा सके।
उत्सुक वनराज के वैसा करते ही
उसका पंज
लकड़ी की दराज में फँस गया।
दर्द से बिलबिलाते शेर ने
आदमी दिखाने की उनसे मिन्नत की।
तब बेफिक्र हो चुके लोगों ने
उसे सगर्व बताया कि
वे ही हैं - आदमी - सर्वजेता
जिन्होंने वनराज को भी फँसाया।
--रचयिता----सर्वानन्द पाण्डेय,' अविज्ञात '
क्षतिकारित न करने का
उन्हें आश्वासन देकर
शेर ने पूछा-
पेड़ की वैसी हालत किसने की?
उत्तर मिला-
आदमी ने।
शेर ने आदमी दिखाने का
उनसे आग्रह किया।
भयभीत आरा वालों ने शेर से कहा-
पहे अपना पंजा वह
लकड़ी की फाँक में लगावे।
ताकि आरा निकालकर आराम से
उसे आदमी दिखाया जा सके।
उत्सुक वनराज के वैसा करते ही
उसका पंज
लकड़ी की दराज में फँस गया।
दर्द से बिलबिलाते शेर ने
आदमी दिखाने की उनसे मिन्नत की।
तब बेफिक्र हो चुके लोगों ने
उसे सगर्व बताया कि
वे ही हैं - आदमी - सर्वजेता
जिन्होंने वनराज को भी फँसाया।
--रचयिता----सर्वानन्द पाण्डेय,' अविज्ञात '
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