बुधवार, 17 जून 2015

भारतीयता
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वेद
वैज्ञानिक ज्ञान का आदि स्रोत
अर्थात् उच्चतम आध्यात्मिक शक्ति का
सर्वस्वीकृत रूप।
चार वेद
ऋक् ,यजु: ,साम और अथर्व ।
वेदों के चार विभाग
संहिता , व्राह्मण , आरण्यक और उपनिषद ।
संहिता
मन्त्रों और सूक्तों का संग्रह ।
व्राह्मण
उपदेशों और धार्मिक कर्तव्यों का विधान ।
आरण्यक
जीवन के रहस्य पर प्रकाश ।
उपनिषद
आत्मज्ञान और व्रह्मज्ञान ।
चार आश्रम
व्रह्मचर्य , गार्हस्थ , वानप्रस्थ और सन्यास
अर्थात् वेदों के चारों विभागों की व्याख्या ।
वेदान्त
वेदों के अन्त में लिखे उपनिषद ही वेदान्त हैं
जो भारतीय दर्शन के मूलाधार हैं ।
महाभारत
लगभग सम्पूर्ण आचार संहिता और समाजशास्त्र
जिसे पाॅंचवाॅं वेद माना गया है ।
गीता
उपनिषदों का नवनीत
हिन्दू चिन्तन की सर्वोत्तम कृति ।
पुराण
सृष्टि सम्बन्धी विचारों के संलक्षक ।
देवता
समस्त प्रकृति शक्तियाॅं ।
ज्ञान - विज्ञान
भारतीय संस्कृति के सम्पर्क सूत्र
जो धुनातन खोजों के
विषय ही नहीं अपितु
सबल आधार भी हैं ।
भारतीय
भारत देश के
सांस्कृतिक - वैज्ञानिक सम्पर्क सूत्रों में
रचा , पला , बसा , और ढला जीवन ।
भारतीयता
भारतीय संस्कृति का ज्ञानपुंज औरयशकीर्ति
जिसके आलोक में भारत
अग्रणी भूमिका निभाया
और जिसे अपनाकर
महान सम्राट अकबर भी
यशस्वी प्रशासक कहलाया ।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '

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