रेलवे का योग
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नियत समय गाड़ी चले , संरक्षित अविराम ।
मितब्ययिता बनी रहे , सुरक्षित अभिराम ।।
कभी शिकायत ना मिले , विनयशील व्यवहार ।
अनुशासन भी बना रहे , सर्वप्रिय आचार ।।
सत्यनिष्ठ सेवा रहे , कर्मनिष्ठ हों आप ।
शोभनीय हर कार्य हो , मन में रहे न ताप ।।
आदेशों निर्देश का , नियमों का सम्मान ।
नियमविहित कर्त्तव्य का , कुकृत्यों का भान ।।
सजग ध्यान के साथ ही , दूरदृष्टि से काम ।
निर्भय हो यात्री सभी , पहुॅंचे अपने धाम ।।
तीब्रगामिता , स्वच्छता ,सद्भावना पूर्ण ।
यात्रा सर्वानन्दमय ,सुविधा दें सम्पूर्ण ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय, अविज्ञात
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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नियत समय गाड़ी चले , संरक्षित अविराम ।
मितब्ययिता बनी रहे , सुरक्षित अभिराम ।।
कभी शिकायत ना मिले , विनयशील व्यवहार ।
अनुशासन भी बना रहे , सर्वप्रिय आचार ।।
सत्यनिष्ठ सेवा रहे , कर्मनिष्ठ हों आप ।
शोभनीय हर कार्य हो , मन में रहे न ताप ।।
आदेशों निर्देश का , नियमों का सम्मान ।
नियमविहित कर्त्तव्य का , कुकृत्यों का भान ।।
सजग ध्यान के साथ ही , दूरदृष्टि से काम ।
निर्भय हो यात्री सभी , पहुॅंचे अपने धाम ।।
तीब्रगामिता , स्वच्छता ,सद्भावना पूर्ण ।
यात्रा सर्वानन्दमय ,सुविधा दें सम्पूर्ण ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय, अविज्ञात
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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