नैतिक पतन
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अधुना नैतिक पतन का कोई नहीं इलाज ।
जबतक उच्चपदस्थ जन बदलें नहीं मिजाज ।।
परिभाषक अब श्लील के आते नजर उदार ।
लगता पश्चिम से लिए वे यह सोच उधार ।।
चले मिटाने देश से , वे ही भ्रष्टाचार ।
सेंसर बोर्ड में बैठ जो फैलावें कुविचार ।।
सोशल साइट से बढ़े तेजी से अपराध ।
डांसबार से फैलता है तलाक अवसाद ।।
अश्लीलता का करे इंटरनेट ब्यापार ।
सरकारें साझी बनीं फैल रहा व्यभिचार ।।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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अधुना नैतिक पतन का कोई नहीं इलाज ।
जबतक उच्चपदस्थ जन बदलें नहीं मिजाज ।।
परिभाषक अब श्लील के आते नजर उदार ।
लगता पश्चिम से लिए वे यह सोच उधार ।।
चले मिटाने देश से , वे ही भ्रष्टाचार ।
सेंसर बोर्ड में बैठ जो फैलावें कुविचार ।।
सोशल साइट से बढ़े तेजी से अपराध ।
डांसबार से फैलता है तलाक अवसाद ।।
अश्लीलता का करे इंटरनेट ब्यापार ।
सरकारें साझी बनीं फैल रहा व्यभिचार ।।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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