बुधवार, 17 जून 2015

समय तालिका
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क्रियाशीलता ही है जीवन ,
सोलह घंटे नित जीते हम ।
प्रतिदिन घंटा एक बढ़ा लें ,
परोपकार में उसे लगा लें ।।
सोलह घंटे में इक घंटा ,
ईश भजन के नाम करा लें।
मात - पिता गुरुजन की सेवा,
में घंटाभर समय लगा लें ।।
चौदह में दो घंटे अपने ,
खेलें , खाएं मौज मनाएॅं ।
बारह घंटे प्रगति कार्य कर ,
धन वैभव यश खूब कमाएॅं ।।
वय किशोर से साठ बरस तक ,
समय तालिका यह अपनाएॅं ।
यदि ऐसा ना कर सकते तो ,
जाॅंय नरक में , हम पछताएॅं ।।
रचयिता -- सर्वानन्द पाण्डेय ,'अविज्ञात '

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