आज ही साफ करा ले
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करा ले , साफ करा ले
आज तू मन से नहाले
मैल अब दूर करा ले
हृदय करुणा से सजा ले ।
दान कुछ अन्न कराले
पेट भूखों का भरा ले
झूठ को दूर भगाले
कलुष अन्तर का मिटा ले ।
आज तन मन से नहा ले
दया उपकार बढ़ा ले
तनिक श्रृंगार हटाले
रूप असली तू दिखाले ।
क्रोध हिंसा को भगाले
प्रकृति को गले लगा ले
अहं ईर्ष्या को मिटाले
पाप गंगा में बहाले ।।
निवेदक और रचयिता ------
कवि सर्वानन्द पाण्डेय , 'अविज्ञात '
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करा ले , साफ करा ले
आज तू मन से नहाले
मैल अब दूर करा ले
हृदय करुणा से सजा ले ।
दान कुछ अन्न कराले
पेट भूखों का भरा ले
झूठ को दूर भगाले
कलुष अन्तर का मिटा ले ।
आज तन मन से नहा ले
दया उपकार बढ़ा ले
तनिक श्रृंगार हटाले
रूप असली तू दिखाले ।
क्रोध हिंसा को भगाले
प्रकृति को गले लगा ले
अहं ईर्ष्या को मिटाले
पाप गंगा में बहाले ।।
निवेदक और रचयिता ------
कवि सर्वानन्द पाण्डेय , 'अविज्ञात '
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