बुधवार, 17 जून 2015

सुशासन
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पैसे का शिक्षण
प्रवन्धन प्रशिक्षण
धन की वर्षा
बढ़ती जिजीविषा ।
हाथों को काम नहीं
परिश्रम का दाम नहीं
चतुर्दिक उपेक्षा
जीवन से अनिच्छा ।
विसमता का आलम
योग्यतम गमगीन
अयोग्य पाकर हर्षा
कहीं धूप कहीं वर्षा ।
जानवर - भोजन
जानवर को भोजन
कहीं आधापेट भोजन
कहीं भोजन पर भोजन
कहीं चोरी का भोजन
कहीं चोरी से भोजन
कहीं भोजन ही भोजन
कहीं दुर्लभ है भोजन ।
रचयिता --- सर्वानन्द पाण्डेय ,' अविज्ञात '

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