जय धनतेरस
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धनतेरस पर धन बचा , मन पर कसो लगाम ।
धन - रक्षण त्यौहार यह , इसको करो प्रणाम ।।
वर्षा पूरी होत है , भींगे पत्थर नाहिं ।
लोभी मन हो तृप्त ना , बरसे धन जगमाहिं ।।
धनसुख से वंचित रहे , वैरागी मन साधु ।
चाहे जितना भी मिले ,तुष्ट न होत असाधु ।
मन की भूख मिटे नहीं , लाख यतन करि गोय ।
वश में जब यह होत है , मिटे भूख सब कोय ।।
यह विवेक की बात ना , आॅंख सहित हो सूर ।
श्रम कर - कर के धन कमा , इसको करते दूर ।।
लक्ष्मी आदर दिवस यह ,श्रम धन अर्जित लाय ।
कई दिवस अनुमन्य जग , धनतेरस सम भाय ।।
खरचें धन हरगिज नहीं , धनतेरस मन लाय ।
चलो बचाएॅं आज धन , लक्ष्मी तिथि हरषाय ।।
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--- रचयिता ---सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञ '
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धनतेरस पर धन बचा , मन पर कसो लगाम ।
धन - रक्षण त्यौहार यह , इसको करो प्रणाम ।।
वर्षा पूरी होत है , भींगे पत्थर नाहिं ।
लोभी मन हो तृप्त ना , बरसे धन जगमाहिं ।।
धनसुख से वंचित रहे , वैरागी मन साधु ।
चाहे जितना भी मिले ,तुष्ट न होत असाधु ।
मन की भूख मिटे नहीं , लाख यतन करि गोय ।
वश में जब यह होत है , मिटे भूख सब कोय ।।
यह विवेक की बात ना , आॅंख सहित हो सूर ।
श्रम कर - कर के धन कमा , इसको करते दूर ।।
लक्ष्मी आदर दिवस यह ,श्रम धन अर्जित लाय ।
कई दिवस अनुमन्य जग , धनतेरस सम भाय ।।
खरचें धन हरगिज नहीं , धनतेरस मन लाय ।
चलो बचाएॅं आज धन , लक्ष्मी तिथि हरषाय ।।
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--- रचयिता ---सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञ '
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