विश्व खाद्य दिवस
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धन सम्पति सब व्यर्थ है , बिना अन्न भण्डार ।
रत्न शान्त ना कर सके , जठरानल टंकार ।।
उत्पादन हो अन्न का , संरक्षण अनुकूल ।
बर्बादी पर रोक हो , ऊपेक्षा प्रतिकूल ।।
कृषकों का सम्मान हो , उन्नत खाद व बीज ।
कृषि ऋृण वितरण हो सरल , दूर हो उनकी खीज ।।
भरी धरा हो अन्न से वितरण मे ना खोट ।
अपमिश्रण पर रोक हो , जमाखोर को चोट ।।
वैज्ञानिक विधि से करें , भण्डारन का योग ।
कृषि कौशल विकसित करें,शिक्षण का उपयोग ।।
दाने कुछ ही काट कर , दुरुपयोग पर रोक ।
भूखों का पोषण करें , मिटा दें उनका शोक ।।
सरकारी सहयोग की , अहम भूमिका मान ।
सजग रहे हर नागरिक , भारत बनें महान ।।
कमी अन्न की ना रहे , संरक्षण ही विकल्प ।
विश्व खाद्यान्न दिवस पर , भण्डारन संकल्प ।।
रचयिता ---- सरवानन्द पाण्डेय 'अविज्ञ'
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धन सम्पति सब व्यर्थ है , बिना अन्न भण्डार ।
रत्न शान्त ना कर सके , जठरानल टंकार ।।
उत्पादन हो अन्न का , संरक्षण अनुकूल ।
बर्बादी पर रोक हो , ऊपेक्षा प्रतिकूल ।।
कृषकों का सम्मान हो , उन्नत खाद व बीज ।
कृषि ऋृण वितरण हो सरल , दूर हो उनकी खीज ।।
भरी धरा हो अन्न से वितरण मे ना खोट ।
अपमिश्रण पर रोक हो , जमाखोर को चोट ।।
वैज्ञानिक विधि से करें , भण्डारन का योग ।
कृषि कौशल विकसित करें,शिक्षण का उपयोग ।।
दाने कुछ ही काट कर , दुरुपयोग पर रोक ।
भूखों का पोषण करें , मिटा दें उनका शोक ।।
सरकारी सहयोग की , अहम भूमिका मान ।
सजग रहे हर नागरिक , भारत बनें महान ।।
कमी अन्न की ना रहे , संरक्षण ही विकल्प ।
विश्व खाद्यान्न दिवस पर , भण्डारन संकल्प ।।
रचयिता ---- सरवानन्द पाण्डेय 'अविज्ञ'
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