जब बड़े- बड़े लोगों की
गलतियों और दोषों की
पकड़ मुझे होती है ,
तब मजबूर हो जाता हूॅं
यह सोचने को कि
मेरी लालच , चोरी ,झूठ ,
व्यसन और नाइंसाफी सम्बन्धी
वैचारिक - व्यावहारिक आडम्बर को भी
वे लोग अवश्य ही देखते - परखते होंगे ,
जिन्हें अति चतुराई से
सायास छिपाते हुए ,
ढिंठाई से मैं आदर्श प्रस्तुत करता रहता हूॅं
और लोगों को ,कमोबेस
प्रभावित कर भी लेता हूॅं ।
गलतियों और दोषों की
पकड़ मुझे होती है ,
तब मजबूर हो जाता हूॅं
यह सोचने को कि
मेरी लालच , चोरी ,झूठ ,
व्यसन और नाइंसाफी सम्बन्धी
वैचारिक - व्यावहारिक आडम्बर को भी
वे लोग अवश्य ही देखते - परखते होंगे ,
जिन्हें अति चतुराई से
सायास छिपाते हुए ,
ढिंठाई से मैं आदर्श प्रस्तुत करता रहता हूॅं
और लोगों को ,कमोबेस
प्रभावित कर भी लेता हूॅं ।
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