सच बोलेगा कौन ?
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ना जाने क्यों विज्ञ जन , साधे पड़े हैं मौन ?
नेता सब बन जाएॅं तो , सच बोलेगा कौन ??
अभिजात्य माडर्न बनि , करें जिस्म व्यापार ।
उत्सुक पड़े हैं शोहदे , लिए अर्थ भण्डार ।।
तुम से ही तो सृष्टि है , और तुम्हीं से नाश ।
आदिमयुग में लौट क्यों , अनुशासन की आस ? ?
मात - पिता से पूछ लो , कपड़े का औचित्य ।
अनायास सम्मोह से , हो जाता अपकृत्य ।।
प्रेम और सौन्दर्यमय , हास्य - लास्य माहौल ।
भावजनित संयोग रुचि , का तब क्यों माखौल ??
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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ना जाने क्यों विज्ञ जन , साधे पड़े हैं मौन ?
नेता सब बन जाएॅं तो , सच बोलेगा कौन ??
अभिजात्य माडर्न बनि , करें जिस्म व्यापार ।
उत्सुक पड़े हैं शोहदे , लिए अर्थ भण्डार ।।
तुम से ही तो सृष्टि है , और तुम्हीं से नाश ।
आदिमयुग में लौट क्यों , अनुशासन की आस ? ?
मात - पिता से पूछ लो , कपड़े का औचित्य ।
अनायास सम्मोह से , हो जाता अपकृत्य ।।
प्रेम और सौन्दर्यमय , हास्य - लास्य माहौल ।
भावजनित संयोग रुचि , का तब क्यों माखौल ??
रचयिता --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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