विचार गाॅंधी के
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सत्य अहिंसा शान्ति ही ,गाॅंधीवाद प्रतीक ।
वाह्यान्तर की शुद्धता , से आचरण पुनीत ।।
करके कहना ही उचित, केवल कहना थोथ ।
लगातार जलते रहे , बनें नही खद्योत ।।
कठिन मार्ग गामी बनें , परोपकार हो ध्येय ।
केवल करतब काम्य हो , ना अभीष्ट हो श्रेय ।।
पापी से घृणा नहीं , करें पाप को दूर ।
जीव मात्र से प्रेम हों , करें कर्म भरपूर ।।
ऊँच - नीच का भेद ना , न्यायपूर्ण आचार ।
दया , क्षमा , सौहार्द का , मन में रहे विचार ।।
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सत्य अहिंसा शान्ति ही ,गाॅंधीवाद प्रतीक ।
वाह्यान्तर की शुद्धता , से आचरण पुनीत ।।
करके कहना ही उचित, केवल कहना थोथ ।
लगातार जलते रहे , बनें नही खद्योत ।।
कठिन मार्ग गामी बनें , परोपकार हो ध्येय ।
केवल करतब काम्य हो , ना अभीष्ट हो श्रेय ।।
पापी से घृणा नहीं , करें पाप को दूर ।
जीव मात्र से प्रेम हों , करें कर्म भरपूर ।।
ऊँच - नीच का भेद ना , न्यायपूर्ण आचार ।
दया , क्षमा , सौहार्द का , मन में रहे विचार ।।
सर्वानन्द पाण्डेय "अविज्ञात"
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