न माने बात से पाजी
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जकीउर रहमान- सा , आतंकी उद्दण्ड ।
लखवी बाहर जेल से , रोष यहाॅं परचण्ड ।
रोष यहॅं परचणड , हिन्द का बच्चा - बच्चा ।
देख धृष्ठता दंग , अडिग खाने को कच्चा ।
कहते सर्वानन्द , पाक को खुदा बचाए ।
हुए अगर अनुदार , उसे कन्दुक - सा नचाएॅं ।।
फिरभी पाकिस्तान ही उलट दिखावे रोष ।
समझा दें अब ठीक से उसको उसका दोष ।
उसको उसका दोष , बताकर करें चढ़ाई ।
चेते अब सरकार , दिखादेे तुरत कड़ाई ।
कहते सर्वानन्द , न माने बात से पाजी ।
क्यों चुप है सरकार ? देशवासी हैं राजी ।।
रचयिता ---- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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जकीउर रहमान- सा , आतंकी उद्दण्ड ।
लखवी बाहर जेल से , रोष यहाॅं परचण्ड ।
रोष यहॅं परचणड , हिन्द का बच्चा - बच्चा ।
देख धृष्ठता दंग , अडिग खाने को कच्चा ।
कहते सर्वानन्द , पाक को खुदा बचाए ।
हुए अगर अनुदार , उसे कन्दुक - सा नचाएॅं ।।
फिरभी पाकिस्तान ही उलट दिखावे रोष ।
समझा दें अब ठीक से उसको उसका दोष ।
उसको उसका दोष , बताकर करें चढ़ाई ।
चेते अब सरकार , दिखादेे तुरत कड़ाई ।
कहते सर्वानन्द , न माने बात से पाजी ।
क्यों चुप है सरकार ? देशवासी हैं राजी ।।
रचयिता ---- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , ' अविज्ञात '
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