रविवार, 31 जनवरी 2016

जबरों को देख बिलबिलाते हैं कुत्ते 
कुत्तों को देख गुर्राते हैं कुत्ते ,
सजातीय विकर्षण दिखाते हैं कुत्ते ।
अपरिचित को आॅंखे दिखाे हैं कुत्ते ,
मिलन हेतु मिन्नत कराते हैं कुत्ते ।।
शिकार पर फुर्ती दिखाते हैं कुत्ते ,
जब घिरते हैं तो धिघियाते हैं कुत्ते ।
अबरों पर ऐंठ दिखाते हैं कुत्ते ,
जबरों को देख बिलबिलाते हैं कुत्ते ।।
लालच में ही लपलपाते हैं कुत्ते ,
इनायत को इल्म दिखाते हैं कुत्ते ।।
रियायत के लिए रिरियाते हैं कुत्ते ,
मौका गवाॅं मिमियाते हैं कुत्ते ।।
दुलार पर दुम हिलाते हैं कुत्ते ,
हिकारत पर आॅंखें फिराते हैं कुत्ते ।
बेठौर आवारा कहलाते हैं कुत्ते ,
ठौर पाते ही पालतू हो जाते हैं कुत्ते ।।
डरने पर दुम दुबकाते हैं कुत्ते ,
चन्द टुकड़ों को चाटुकार बन जाते हैं कुत्ते ।
लाचारी में ही लिबलिबाते हैं कुत्ते ,
झपट - छिन मौज उड़ाते हैं कुत्ते ।।
हार के डर से हनक दिखाते हैं कुत्ते ,
लूटने को सनकी बन जाते हैं कुत्ते ।
लाभ पर लोटपोट हो जाते हैं कुत्ते ,
देने को दूर हट जाते हैं कुत्ते ।।
हर सीजन सुहागिनें बनाते हैं कुत्ते ,
मोहपाश में न बॅंधाते हैं कुत्ते ।
अपनों को भी काट खाते हैं कुत्ते,
हर चतुराई मानव के दिखाते हैं कुत्ते ।।
पर , बचने को भौंकना सिखाते हैं कुत्ते ,
बफादारी का मिसाल बन जाते हैं कुत्ते ।
गोदी में , गाड़ी में , विस्तर में कुत्ते ,
जीवनाथी की कमी पुराते हैं कुत्ते ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।

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