उधमी श्रीकृष्ण
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उधम मचाकर माॅं जसुमति को ,
अजब ही नाच नचाते हैं ।
पानी थाल चन्द्रमा देखें ,
दोनों कर छपकाते हैं ।।
पेटभरे ना जब माखन से ,
छिपकर माटी खाते हैं ।
कहने पर मुॅंह खोल वे अपने ,
लोक तीन झलकाते हैं ।।
माखनचोर पकड़ जाने पर ,
रस्सी में बॅंध जाते हैं ।
झूठे आश्वासन से माॅं को ,
बालक कृष्ण छकाते हैं ।।
तंग करें खुद बलदाऊ को ,
नाहक उन्हें फॅंसाते हैं ।
राज की बातें स्वयं उगलते,
कहते मोल बताते हैं ।।
बड़री अॅंखियाॅं ,घुॅंघराले लट ,
नूपूर पाॅंव बजाते हैं ।
लसित मालमणि उर पर लटके ,
सबकी चैन चुराते हैं ।।
--- सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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उधम मचाकर माॅं जसुमति को ,
अजब ही नाच नचाते हैं ।
पानी थाल चन्द्रमा देखें ,
दोनों कर छपकाते हैं ।।
पेटभरे ना जब माखन से ,
छिपकर माटी खाते हैं ।
कहने पर मुॅंह खोल वे अपने ,
लोक तीन झलकाते हैं ।।
माखनचोर पकड़ जाने पर ,
रस्सी में बॅंध जाते हैं ।
झूठे आश्वासन से माॅं को ,
बालक कृष्ण छकाते हैं ।।
तंग करें खुद बलदाऊ को ,
नाहक उन्हें फॅंसाते हैं ।
राज की बातें स्वयं उगलते,
कहते मोल बताते हैं ।।
बड़री अॅंखियाॅं ,घुॅंघराले लट ,
नूपूर पाॅंव बजाते हैं ।
लसित मालमणि उर पर लटके ,
सबकी चैन चुराते हैं ।।
--- सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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