दर्द
दर्द से क्यों ऊबकर , कहते हो जीवन दर्द है ?
हॅंसमुखी से सीख लो , जीना हमारा फर्ज है ।
दर्द जिसको तनिक ना हो, वह भला क्या मर्द है ?
जो नहीं हमदर्द , समझो वह मरा - सा सर्द है ।।
जो हॅंसावे दूसरों को , हर रहा वह दर्द है ।
दर्द सहकर भी हॅंसे जो , वाकई वह मर्द है ।
कमजोर पर जो ही हॅंसे ,समझो कि वह नामर्द है ।
हास्यरस आबाद हो , नतसिर हमारा अर्ज है ।।
आपका ही --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक ,पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
दर्द से क्यों ऊबकर , कहते हो जीवन दर्द है ?
हॅंसमुखी से सीख लो , जीना हमारा फर्ज है ।
दर्द जिसको तनिक ना हो, वह भला क्या मर्द है ?
जो नहीं हमदर्द , समझो वह मरा - सा सर्द है ।।
जो हॅंसावे दूसरों को , हर रहा वह दर्द है ।
दर्द सहकर भी हॅंसे जो , वाकई वह मर्द है ।
कमजोर पर जो ही हॅंसे ,समझो कि वह नामर्द है ।
हास्यरस आबाद हो , नतसिर हमारा अर्ज है ।।
आपका ही --- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक ,पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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