भाई बने कलाम
बहनों का अरमान है , भाई बनों कलाम ।
ज्ञान मान सम्मान से , बन जा देश ललाम ।
बनजा देश ललाम , भेद मत मन में रखना ।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख , इसाई सबसंग रहना ।
कहते सर्वानन्द , मिटा दो भेद की खाई ।
बहन मनावे खैर , मान सबको ही भाई ।।
भाई ने उपहार में , वचन दिया गम्भीर ।
रक्षा तेरी सब करें , रहो न तनिक अधीर ।
रहो न तनिक अधीर , पीर तेरी हर लेंगे ।
उत्पीड़न से मुक्त , तुम्हें हमसब कर देंगे ।
कहते सर्वानन्द मुक्तमन विचरण करना ।
रहना तू उन्मुक्त , ज्यादती कभी न सहना ।।
छोड़ो बीती बात को , बहुत हुईी तकरार ।
बढ़ आगे सद्भाव से , सुविधा की भरमार ।
सुविधा की भरमार , दिखा दो प्रतिभा अपनी ।
हक का रहे संज्ञान , एक हो कथनी -- करनी ।
कहते सर्वानन्द लायॅं , समता घर - घर में ।
सम होगा अनुपात , पुत्र - पुत्री की दर में ।।
जय रक्षावन्धन ।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञातल,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
बहनों का अरमान है , भाई बनों कलाम ।
ज्ञान मान सम्मान से , बन जा देश ललाम ।
बनजा देश ललाम , भेद मत मन में रखना ।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख , इसाई सबसंग रहना ।
कहते सर्वानन्द , मिटा दो भेद की खाई ।
बहन मनावे खैर , मान सबको ही भाई ।।
भाई ने उपहार में , वचन दिया गम्भीर ।
रक्षा तेरी सब करें , रहो न तनिक अधीर ।
रहो न तनिक अधीर , पीर तेरी हर लेंगे ।
उत्पीड़न से मुक्त , तुम्हें हमसब कर देंगे ।
कहते सर्वानन्द मुक्तमन विचरण करना ।
रहना तू उन्मुक्त , ज्यादती कभी न सहना ।।
छोड़ो बीती बात को , बहुत हुईी तकरार ।
बढ़ आगे सद्भाव से , सुविधा की भरमार ।
सुविधा की भरमार , दिखा दो प्रतिभा अपनी ।
हक का रहे संज्ञान , एक हो कथनी -- करनी ।
कहते सर्वानन्द लायॅं , समता घर - घर में ।
सम होगा अनुपात , पुत्र - पुत्री की दर में ।।
जय रक्षावन्धन ।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञातल,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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