गुरु ज्ञान की महिमा
अल्प ज्ञान जब मुझे हुआ ,
गजराज समान मदान्ध हुआ ।
ज्ञानी होने का गर्व हआ ,
विश्वास हुआ सर्वज्ञ बना ।
लेकिन गुरुजन विद्वानों की ,
संगति से मदज्वर उतर गया ।
पाकर खुद को मैं महामूर्ख ,
निज अज्ञानता से उबर गया ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्यनियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
अल्प ज्ञान जब मुझे हुआ ,
गजराज समान मदान्ध हुआ ।
ज्ञानी होने का गर्व हआ ,
विश्वास हुआ सर्वज्ञ बना ।
लेकिन गुरुजन विद्वानों की ,
संगति से मदज्वर उतर गया ।
पाकर खुद को मैं महामूर्ख ,
निज अज्ञानता से उबर गया ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्यनियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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