हूँ मित्र साठ का मैं वय से
कुछ जुड़ेे हुुएे , जो जुडेंं कभी ,
दिल की बगिया के फूल सभी ।
फूलोंं को महक का नहीं पता
आनन्दित मुझको करें सभी ।।
सुख अपना व्यक्त करूॅॅं कैसे ,
ज्ञापित कृृतज्ञता हो कैैसेे ?
पााकर सबको बड़भागी मैैं ,
हूॅॅं मित्र साठ का मैं वय सेे ।।
कुछ जुड़ेे हुुएे , जो जुडेंं कभी ,
दिल की बगिया के फूल सभी ।
फूलोंं को महक का नहीं पता
आनन्दित मुझको करें सभी ।।
सुख अपना व्यक्त करूॅॅं कैसे ,
ज्ञापित कृृतज्ञता हो कैैसेे ?
पााकर सबको बड़भागी मैैं ,
हूॅॅं मित्र साठ का मैं वय सेे ।।
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