अंगकान्ति तो जगदम्बा की ,
सूर्य सहस्त्र समान हैै ।
उर पर मुण्डमाल अतिशोभित ,,
रक्ताम्बर द्युतिमान है ।।
स्तनद्वय चन्दन से लेपित ,
मुख मोहक अभिराम है ।
तीन नेत्र त्रिभुवन की माया ,
चन्द्र मुकुट तो ललाम हैै ।।
जपमालिका , विद्या कर से ,
अभया का वरदान हैै ।
कमलासन तिष्ठित देवी को ,
बारम्बार प्रणाम है ।।
---कवि सर्वाानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्यनियंत्रक , पूर्वोत्तररेलवे वाराणसी ।
सूर्य सहस्त्र समान हैै ।
उर पर मुण्डमाल अतिशोभित ,,
रक्ताम्बर द्युतिमान है ।।
स्तनद्वय चन्दन से लेपित ,
मुख मोहक अभिराम है ।
तीन नेत्र त्रिभुवन की माया ,
चन्द्र मुकुट तो ललाम हैै ।।
जपमालिका , विद्या कर से ,
अभया का वरदान हैै ।
कमलासन तिष्ठित देवी को ,
बारम्बार प्रणाम है ।।
---कवि सर्वाानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्यनियंत्रक , पूर्वोत्तररेलवे वाराणसी ।
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