त्याग देते सब्र भी
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आहत करे जब कामपीड़ा ,
साधुता सत्वर हरे ।
तन मन समर्पित भोग में ,
सज्जन को भी पागल करे ।
दृढ़ सत्यपथ गामी पुरुष ,
सज्जन मनस्वी नम्र भी ।
मान मर्यादा विमुख हो ,
त्याग देते सब्र भी ।।
( मेरे कावयानुवाद " शतकत्रयी " से )
---कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
नुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे ।।
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आहत करे जब कामपीड़ा ,
साधुता सत्वर हरे ।
तन मन समर्पित भोग में ,
सज्जन को भी पागल करे ।
दृढ़ सत्यपथ गामी पुरुष ,
सज्जन मनस्वी नम्र भी ।
मान मर्यादा विमुख हो ,
त्याग देते सब्र भी ।।
( मेरे कावयानुवाद " शतकत्रयी " से )
---कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
नुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे ।।
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