बेपर्द होने से बचें
छू नहीं सकता जमाना , बेइजाजत आपको ।
बस बदन , जेहन औ जुबाॅं , बेपर्द होने से बचे ।।
परिचय के संग चित्र लगाना ,
यह तो बहुत जरूरी है ।
मित्रों का पहिचान जानना ,
सबको सख्त जरूरी है ।।
परिवारों , बच्चों का फोटो ,
आनन्द सुखदायी है ।
आयोजनों, समारोहों का ,
दृश्य प्रेरणादायी है ।।
नदी , पहाड़ों , झीलों , झरनों ,
पुष्प , लताओं ,सगर से ।
उद्यानों , भवनो , यानों के ,
चित्र न कम हैैंं आखर से ।।
भाॅंति -भाॅंति के पशु - पक्षी भी ।
उुपयोगी मनभावन हैैं,
यंत्र ,मशीनेंं , शालाएं भी,
धर्मस्थल भी पावन हैैं ।।
कविताा गीत, लेख,सम्बादों,
कथा - कहानी भावों को ,
ग्रंथ -- उद्ररण हास्यामृत सेे ,
भर दें दिल के घावों को।।
पर कामुक चित्रोंं -भावों से ,
अपशब्दों और वारों से ।
तनिक करें परहेज मित्र जन ,
नंगेपन , अ्तिचारों से ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अवििज्ञात ,
मुखयनियंंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे ,वाराणसी ।
छू नहीं सकता जमाना , बेइजाजत आपको ।
बस बदन , जेहन औ जुबाॅं , बेपर्द होने से बचे ।।
परिचय के संग चित्र लगाना ,
यह तो बहुत जरूरी है ।
मित्रों का पहिचान जानना ,
सबको सख्त जरूरी है ।।
परिवारों , बच्चों का फोटो ,
आनन्द सुखदायी है ।
आयोजनों, समारोहों का ,
दृश्य प्रेरणादायी है ।।
नदी , पहाड़ों , झीलों , झरनों ,
पुष्प , लताओं ,सगर से ।
उद्यानों , भवनो , यानों के ,
चित्र न कम हैैंं आखर से ।।
भाॅंति -भाॅंति के पशु - पक्षी भी ।
उुपयोगी मनभावन हैैं,
यंत्र ,मशीनेंं , शालाएं भी,
धर्मस्थल भी पावन हैैं ।।
कविताा गीत, लेख,सम्बादों,
कथा - कहानी भावों को ,
ग्रंथ -- उद्ररण हास्यामृत सेे ,
भर दें दिल के घावों को।।
पर कामुक चित्रोंं -भावों से ,
अपशब्दों और वारों से ।
तनिक करें परहेज मित्र जन ,
नंगेपन , अ्तिचारों से ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अवििज्ञात ,
मुखयनियंंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे ,वाराणसी ।
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