आराम से सोता हूँ
न तो मैं हारा हुआ जुवारी हूॅं ,
न ही अनाड़ी खिलाड़ी हूॅं ।
मैं तो अधोगामी मानवता का ,
सामान्य स्तर का एक पुजारी हूॅं ।
भलाई करके स्वयं को ,
मै परमधन्य मानता हूॅं ।
ईर्ष्या करने वालों के लिए भी ,
अपना सारा कार्य छोड़ ,
सदैव प्रस्तुत रहता हूॅं ।
इसे मेरी मूर्खता न मानें ,
मैं तो परले कोटि की ,
बुद्धिमत्ता मानते हुए ,
अपनी पीठ स्वयं थपथपा लेता हूॅं ।
इसी से आठ घंटों की नींद ,
आराम से सोता हूॅं ।।
जय हो ।
न तो मैं हारा हुआ जुवारी हूॅं ,
न ही अनाड़ी खिलाड़ी हूॅं ।
मैं तो अधोगामी मानवता का ,
सामान्य स्तर का एक पुजारी हूॅं ।
भलाई करके स्वयं को ,
मै परमधन्य मानता हूॅं ।
ईर्ष्या करने वालों के लिए भी ,
अपना सारा कार्य छोड़ ,
सदैव प्रस्तुत रहता हूॅं ।
इसे मेरी मूर्खता न मानें ,
मैं तो परले कोटि की ,
बुद्धिमत्ता मानते हुए ,
अपनी पीठ स्वयं थपथपा लेता हूॅं ।
इसी से आठ घंटों की नींद ,
आराम से सोता हूॅं ।।
जय हो ।
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