रविवार, 31 जनवरी 2016

तस्मै श्री गुरवे नम: 

ज्ञान का दीपक जलाएॅं ,
तम हृदय का ये मिटाएॅं ।
सुपथ जीवन का दिखाकर ,
सबल हर मन को बनाएॅं ।।
तप परिश्रम की महत्ता ,
शिष्यगण को गुरु बताएॅं ।
धैर्य से उद्यम - निरत रह ,
शिष्य में सद्गुण जगाएॅं ।।
सत् अहिंसा शान्ति का ,
संदेश वाहक ये बनाएॅं ।
दूर करके विकार मन का ,
शिष्य का जीवन सजाएॅं ।।
क्षमा करुणा युक्त करके ,
क्रोध ईर्ष्या को भगाएॅं ।
भाव मैत्री का सिखाकर ,
शिष्य को उन्नत बनाएॅं ।।
कला संस्कृति कुशल करके ,
शिष्ट सज्जन भी बनाएॅं ।
वेद से विज्ञान तक की ,
सुगम यात्रा य़े कराएॅं ।।
लोक जन कल्याण में तो ,
निपुण शिष्यों को बनाएॅं ।
गुरु की महिमा का चलो हम ,
सिर झुकाकर गीत गाएॅं ।।
--- सर्वैनन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।

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