बदहुकूमत
फिरकापरस्ती ताकतें , मौकापरस्ती हरकतें ।
मजबूत ये पाये हैं दोनों , आज के जनतंत्र के ।।
नेता पुलिस कुछ अफसरों की , घालमेली तिकड़में ।
मंजर तमाशा का बना , पेशे नजर औकात है ।।
आतकवादी हैं बने , तमाशाई हुड़दंगिए ।
लाचार जनता तो बनी , अब करतबी लंगूर है ।।
शह मत का यह खेल या ,है बेबसी लंगूर की ?
तमाशबीन मदारिए , हैं समझते नामर्द हैं ।।
हौशला अफजाई अब , बम गोलियों से हो रहा ।
फैक्ट्री से मिलते एक ही , दोनों को ही हथियार हैं ।।
दोनों के चलते खर्च भी हैं , एक ही तो स्रोत से ।
पहला तो कर है वसूलता ,पर रंगदारी दूसरा ।।
है सरपरस्ती खोजती , जनता इन्हीं के बीच से ।
पर , है मुनासिब सोचना ,कि विकल्प कोई अन्य है ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
फिरकापरस्ती ताकतें , मौकापरस्ती हरकतें ।
मजबूत ये पाये हैं दोनों , आज के जनतंत्र के ।।
नेता पुलिस कुछ अफसरों की , घालमेली तिकड़में ।
मंजर तमाशा का बना , पेशे नजर औकात है ।।
आतकवादी हैं बने , तमाशाई हुड़दंगिए ।
लाचार जनता तो बनी , अब करतबी लंगूर है ।।
शह मत का यह खेल या ,है बेबसी लंगूर की ?
तमाशबीन मदारिए , हैं समझते नामर्द हैं ।।
हौशला अफजाई अब , बम गोलियों से हो रहा ।
फैक्ट्री से मिलते एक ही , दोनों को ही हथियार हैं ।।
दोनों के चलते खर्च भी हैं , एक ही तो स्रोत से ।
पहला तो कर है वसूलता ,पर रंगदारी दूसरा ।।
है सरपरस्ती खोजती , जनता इन्हीं के बीच से ।
पर , है मुनासिब सोचना ,कि विकल्प कोई अन्य है ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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