सज्जन
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मदलोभ सज्जन त्यागकर ,
क्षमया ही पाप से विरत हो ।
सद्वचन सच्चे मार्ग से ,
विद्वान सेवा निरत हो ।
यश कीर्ति की रक्षा करे ,
हित दीन साधक नम्रता ।
सम्मान करता श्रेष्ठ का ,
वैरी से भी तो विनम्रता ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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मदलोभ सज्जन त्यागकर ,
क्षमया ही पाप से विरत हो ।
सद्वचन सच्चे मार्ग से ,
विद्वान सेवा निरत हो ।
यश कीर्ति की रक्षा करे ,
हित दीन साधक नम्रता ।
सम्मान करता श्रेष्ठ का ,
वैरी से भी तो विनम्रता ।।
--- कवि सर्वानन्द पाण्डेय , अविज्ञात ,
मुख्य नियंत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे , वाराणसी ।
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