आगमन नव रात साथी !
अस्त होने को विकल अ्ब ,,
सूर्य तज निज ताप साथी !
मनीष मन संकेत देता ,
आगमन नव रात साथी !!
रा्त्रि के अवसान पर फिर ,
उषा का मुस्कान साथी !
रवि अतुल कंचन समेटे ,
लाए फिर दिनमान साथी !!
सरोज गरिमा से सजाए ,
ज्ञानवी का हाथ साथी !
सुधांशु अरु दिव्यांशु फिर तो ,
नवल तनय हिमांशु साथी !!
त्यागमय अवदान तेरा ,
मिल रहा अनवरत साथी !
स्वत्व को अपने मिटाकर ,
सुलभ सर्वानन्द साथी !
आगमन नवरात साथी !!
--- कवि सर्वाानन्द पाण्डेय, अ्विज्ञात ,
मुख्यनियत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे ,, वाराणसी ।
सूर्य तज निज ताप साथी !
मनीष मन संकेत देता ,
आगमन नव रात साथी !!
रा्त्रि के अवसान पर फिर ,
उषा का मुस्कान साथी !
रवि अतुल कंचन समेटे ,
लाए फिर दिनमान साथी !!
सरोज गरिमा से सजाए ,
ज्ञानवी का हाथ साथी !
सुधांशु अरु दिव्यांशु फिर तो ,
नवल तनय हिमांशु साथी !!
त्यागमय अवदान तेरा ,
मिल रहा अनवरत साथी !
स्वत्व को अपने मिटाकर ,
सुलभ सर्वानन्द साथी !
आगमन नवरात साथी !!
--- कवि सर्वाानन्द पाण्डेय, अ्विज्ञात ,
मुख्यनियत्रक , पूर्वोत्तर रेलवे ,, वाराणसी ।
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